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Wednesday, May 16, 2012

नमकीन आंसू

लाख दबाये आंसू ये...
मीलों श्वेत बर्फ की गहराई में...
सोचा ये जम कर तो रुकेंगे...
कुछ पल को तो आंसू थमेंगे.......
पर इन आंसुओं की नमकीन गर्मी ने...
पर्वत भी पिघला दिए बर्फ के............
फिर पूरी ओड़ ली जैसे मैंने...
ये सफ़ेद मखमल रुई की रजाई ..............
शायद ये आंसू सांसों की ठंडक से जम जाएँ............
ह्रदय गति के साथ, गति आंसुओं की थम जाए................रामेश्वरी 

2 comments:

  1. पूरी ओड़ ली जैसे मैंने ... ये सफ़ेद मखमल रुई की रजाई.

    Kitni koshish ki ... es jeevan se jeetne ki, in sangharson se jeetne ki. Fir majbooran akhiri rashta hi aajmana pada .. ह्रदय गति के साथ, गति आंसुओं की थम जाए

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  2. kabhi kabhi insaan ladtey ladtey thak jata hai...mout hi uska aakhiri rasta ban jata hai brother....

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