ऊँची नीची पगडंडियों से..
जब जब सफ़र किया मैंने..
सीधी घर की राह पाई मैंने...
जब जब पग सीधी राह थे ..
ना जाने किसकी मंजिल थी वो.....
जिसे अपना बना बैठे.........
(रामेश्वरी)
जब जब सफ़र किया मैंने..
सीधी घर की राह पाई मैंने...
जब जब पग सीधी राह थे ..
ना जाने किसकी मंजिल थी वो.....
जिसे अपना बना बैठे.........
(रामेश्वरी)
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