मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
Search My Blog
Wednesday, May 16, 2012
वो बेरहम कितने हैं देखिये...
हुजुर जलाते भी रहे हमें...
और बुझाने आग जलन की ..
आंसू भी हमी से बहाने को कह गए............रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment