रख ले हमें भी...
बंद किताब के पन्नो पर...
गम की बरसात से सिले हैं अभी...
सहेज ले हमें, समेट ले हमें ..
अज़र कर देना हमें, रख पन्नो पर....
सुगंध हमारी रहेगी आँगन तेरे ..
जब जब पन्ने पलटोगे तुम...
साथ पाओगे मेरा जब २..
पढ़ोगे सुगंध से सने मेरे, लफ्ज़ तुम ...
मिट कर भी अक्शहमारा मिलेगा..
उन बंद किताबों के पन्नो पर...........रामेश्वरी

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