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Sunday, May 13, 2012

कैसे रुसवा करूं..
इन आंसुओं को ...
गिरा उस इंसान की ..
बंजर धरती(दिल) पर...........
कोई कोपलें आज तक..
फूटी नहीं उस धरती पर.......
कितने सावन आये वहां..
आंसू बहाकर चले गए..
शायद ये वो बर्फीला टीला है ...
जो आज तक पिघला नहीं....
रामेश्वरी

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