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Wednesday, May 16, 2012

main ram tum shabri

चले जहाँ जहाँ कदम...
सोचा उस डगर पग होंगे संग तुम्हारे...
चुन लेंगे सब शूल राह के..
होंगी यदि कुछ खट्टी मीठी यादें वहां...
चख लोगे तुम संग बैठ घने वृक्ष तले..
पर शायद हम ही राम न थे..
वरना तुम भी शबरी होतीं.....रामेश्वरी

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