प्रेम कोई सौदा ऐ व्यापार नहीं..
दिया है तो लिया भी जाए...
हर कोई इसमें व्यापार क्यूँ खोजता है..
व्यापार किया जब स्वार्थ से...
फिर बेवफाई पर मूरख गिला क्यूँ करता है...
व्यापार कोई बा-वफाई से..
कोई बेवफाई से करता है......................रामेश् वरी
दिया है तो लिया भी जाए...
हर कोई इसमें व्यापार क्यूँ खोजता है..
व्यापार किया जब स्वार्थ से...
फिर बेवफाई पर मूरख गिला क्यूँ करता है...
व्यापार कोई बा-वफाई से..
कोई बेवफाई से करता है......................रामेश्
No comments:
Post a Comment