जब तलक रूह में, वो हमें ईमान देगा...
बुराई से,खौफ से लड़ने का साजो सामान देगा..
हाथों में शमशीर ना सही, कलम को हमारी म्यान देगा ..
जुबां पर पैने तीर ना सही, उस पर इक कमान देगा...
दिलों में सम्मान, उड़ने को हमें खुला सा आसमां देगा...
लड़ना है दूर तलक, इस दफा अच्छाई को पुष्पक विमान देगा..
साथ कोई हनुमान ना सही, किष्किन्धा सी आवाम तो देगा ...
दामन रहे पाक साफ़ इस दलदल से, ऊँची वो मचान देगा ...
घुटन है हर सीने में अब, कब वो बेजुबानों को जुबां देगा ...
दो जून रोटी खा सके सुकून से हम, बस कब हमें वो ये इत्मीनान देगा ...............रामेश्वरी
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