Search My Blog

Thursday, May 17, 2012

गर पता ढूंढो जो मेरा..

गर पता ढूंढो जो मेरा..
इस पते पर मेरे आना..
जहाँ हर गम की दवा हो..
बहती शीतल नीर और हवा हो...
जहाँ दुःख भी पहनते सुख का जामा हो..
जो भीड़ में भी अकेला हो...
जहाँ दोस्त भी उसका  दुश्मन सा हो..
ज़िन्दगी खड़ी दौराहा हो...
रिश्तों से मन जिसका उठा है..
जो सबसे जुदा जुदा है..
अन्तर आत्मा ही उसका खुदा है...
धुप लगे जिसे  छांव हो..
छालों में सने जिसके पाँव हो...
गुमशुदा जहाँ मुस्कान हो..
बस चल रही उसकी जान हो...
समझो सही ठिकाना आ गया..
देना एक दस्तक बस ..
उसके मस्तिष्क पटल पर..
सोयी है वो बहुत दिनों से ..
गम की आगोश में...रामेश्वरी 







No comments:

Post a Comment