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Saturday, May 5, 2012

लेखनी जब तुम लिखो

लेखनी जब तुम लिखो, रोशनाई से अपनी..
सच  उजागर करते गीत लिखना...
ना दिन को रात, रात को दिन लिखना...
भारत की बेटी हो तुम, है तुम्हें एहसास सब..
नारी की ह्रदय पीड़ा लिखना, ह्रदय उसका विशाल लिखना ..
सौन्दर्य बसता यहीं है, यहाँ की सादगी, भोलापन लिखना..
वीर वीरांगनाओं की जननी है ये, इस माता की गौरव गाथा लिखना..
हुए कई कपूत भी यहाँ, उनकी अस्मत पर धित्कार लिखना ..
माँ के गोद में, प्रतिदिन हत्या होती बेटियों की..
अस्मत बेमोल लूट रही, माँ है शर्मसार लिखना...
गूंगी अब उसकी जुबान लिखना..
जो लिखा ना सको, अपनी रोशनाई को बस स्याही लिखना...
लिखो तो बस देश का  गौरवमय इतिहास लिखना..रामेश्वरी 

2 comments:

  1. जो लिखा ना सको, अपनी रोशनाई को बस स्याही लिखना...
    ----------wah !!!!!!!-------

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