मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Wednesday, January 25, 2012
इक दिया काफी नहीं था घर के इस चिराग के लिए..
सो जाते२"रामी""वो तेरा तमाम आँगन जला गया.....रामेश्वरी
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