मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Saturday, January 7, 2012
आईना बोला देख उसे..
कल तलक में समझी नहीं...
मैं क्यूँ इतनी परेशान सी थी..
तेरी सूरत क्यूँ आजतक अनजान सी थी
आज समझी कल तक तो तेरी जात एक
इंसान
थी..?
(रामेश्वरी)
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