जिसे वो कहती रही भाई भाई..
कैसे वो निकला देखो कसाई ..
करनी थी रक्षा जिस भाई ने ..
की आबरू उसी ने तार तार है..
करा कैसे उसने विस्वास का विस्वासघात ..
करा कैसे उसने उसके तन पर यूँ आघात ..
जिस राखी की डोर से बंधे वो दोनों थे...
उधाड़ दी उस डोर से बनी लाज उसने ....
आज तक वो शायद डरी सहमी होगी..
भाई शब्द ही जैसे लगता हो उसे डसने..
रिश्ता रिश्ता है..खून का मोहताज नहीं..
रिश्तों को कैसे विस्वास का मोहताज उसने किया .......
कुछ दिनों पहले के लड़की की कहानी क्रैईम पेट्रोल में आ रही थी...कैसे वो भाई के दोस्त को भाई की समझती थी और कहती भी थी....कैसे उसने उसकी अस्मत तार२ तो की ही उसकी हत्या भी कर दी थी..........विस्वास इतना मजबूत था की माता पिता और भाई को उसे दूंदने में बहुत वक़्त लगा तब तक उस लड़की की हत्या हो चुकी थी.......
No comments:
Post a Comment