मिट गयी शताब्दियाँ, मिट गयी कई आबादियाँ ...
मिटते गए करने वाले जुल्मियों के जुल्म-ओ-सितम ...
गौरी आये गोरे गए, मिटे मुगलों के महल-ओ-हरम ...
ये देश है कबीर का, ग़ालिब का, गौतम का, राम का....
रहा अमर हमारा नाम, मिट गए कई खाक में रहे नाम का...रामेश्वरी
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