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Wednesday, January 18, 2012

दिल्ली शहर है दिलवालों का, हर प्रांत, भाषी, जाति, धर्म के लोगो का ..
ये उम्मीदों के सपनो को पूरा करे, लाखों का ये भूखा उदर भरे..
ये तुगलक, शाहजहाँ, कुतुबुदीन ऐबक, की दिल्ली..मजनू का टिल्ला दिल्ली ...
ये ग़ालिब के शेरो-ऐ-ग़ज़लों की गवाह है हमारी दिल्ली ...
यहाँ की चमचमाती दौडती सड़कों पर दौडती ज़िन्दगी ..
यहाँ शांति से सब करें अपने२ दीन और धर्म की बंदगी .....रामेश्वरी

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