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Saturday, January 7, 2012

बादलों ने कर गडगडाहट ..
हमें प्राकृतिक संगीत सुनाया है...
गड़ गड़ बादलों ने गाया..
ओलो ने टनटन कर वाद्ययंत्र ..
बजाये है ...
वर्षा ने कलकल मधुर धुन...
छेड़ी है...
शीत लहर ने श्ह्श्श कर नृत्य ..
सा करवाया है....
न जाने इतने पर चाँद क्यूँ..कर..
लज्जाया है..रामेश्वरी 

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