मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Monday, January 30, 2012
कह दो मचलते परवानो से, ये शमां नहीं दीवानों के लिए |
ये शमां बैरागी है, जले कभी मंदिर कभी मस्जिद के आँगन |
धर्म का सही ज्ञान, जाति धर्म का भेद दिलों से मिटाने के लिए|
जाओ परवानो ढूँढो कोई और शमां, अपने2आशियाने के लिए| (रामेश्वरी----स्पर्धा के लिए )
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