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Wednesday, January 25, 2012

रात कटी, दिन ना कटे...
कटे अब कैसे दिन रैन....
पिघलाऊँ कैसे, जिन टकटकी लगी..
जैसे द्वार पर जम गए मेरे नैन....
अभी २ आई तुम्हारे आने की ज्यूँ ..
ताजा खबर, कुछ झपके थे नैन मेरे ...
कहीं कानो सुनी अफवाह ना हो..
सोच कर जम गए द्वार पर फिर नैन मेरे .....रामेश्वरी

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