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Thursday, January 19, 2012

जब हम बच्चे थे...
अक्ल से कितने कच्चे से थे..
खवाब बड़े थे उन्हें पूरा करने को..
चाहते बड़े होना जल्दी थे....
अब हम बड़े हैं ...
ज़िन्दगी छोटी है ...
अब हम बच्चा बनना चाहते हैं ...
जिन अरमानो को पूरा करने की चाह में ..
बड़े होना चाह समय से पहले...वही 
अरमान दबा कर रखे हैं...
अब उसी उम्र को देखो..
रोकना हम चाहते हैं...
ज्यूँ ज्यूँ साल साल बढते हैं..
ज़िन्दगी छोटी छोटी होती जा रही...
उतना प्यार सा हो गया है ज़िन्दगी से...
इक इक लम्हा कीमती होता जाता है....
इन लम्हों को प्यार और अपनेपन से जियें...तकरार की बात क्यूँ और किसलिए .................सुप्रभात मित्रों...

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