मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Tuesday, January 10, 2012
ईमान ना
राम
और ना ही राकिब है!
गर डोला ईमान तुम्हारा इक मय की ..
बोतल
और चंद सिक्कों से...
उनका सत्ता की मय और सिहासी खजाने ..
से डोलना क्यूँ नहीं मुनासिब है ??...रामेश्वरी
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