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Friday, July 6, 2012

कभी कभी सुन्दर वास्तु की रचना करने वाला खुद कुरूप होता है...
भिन्न२ और विभिन्न रंगों के पुष्प खिलने वाला माली भी सुन्दर हो ज़रूरी नहीं...
हाँ उसकी मेहनत सुन्दर है, उसका संघर्ष जो उसने उन पौधों को बड़ा करने में किया वो खूबसूरत है|
आकाश नीला है और नीला है रहेगा...पर जब वो इन्द्रधनुष की रचना करता है, या बदलियों को विभिन्न रूप देता है वो बहुत खूबसूरत बन जाता है|
सो मित्रों अपने रंग रूप पर इतराओ ना..कर्म ही सुन्दर है||..........रामेश्वरी

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