मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Saturday, March 31, 2012
आंसू
अब कोई शिकवा और शिकायते नहीं...
वो जब जब हमारे आंसुओं पर हंस रहा है...
हम तो काट चुके गम की राह तक़रीबन पूरी अब...
पर उस नासमझ को मालूम नहीं,
खुदा उसके नाम अभी, कुछ आंसू लिख रहा है.............रामेश्वरी
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