फागुन आया है ...
होली है होली है..
यही प्रेम की हंसी है..
यही प्रेम की ठिठोली है..
सभी हंसी ठिठोली माफ़ ..
आज होली है .....
रंगों से सरोबार, आ रही ..
होलियारों की टोली है ..
हर तरफ रंग है गुलाल है .
पीछे२ नर आगे आगे नारियां हैं ..
नन्हे हाथों में चल रहीं..
पिचकारियाँ हैं..
झाँकू झरोखे से निहारने ..
होली की हुडदंग ..
सफ़ेद चुनर मेरी, बिन रंगरेज ..
रंगी इतने रंग...
श्वेत स्याम वर्ण समान भये ..
आज हर गोरी राधा लगे,
हर युवा कान्हा भये ..
प्रकृति भी आतुर खेलने होली..
पलाश से लाल, सरसों से पीली..
वो भी बौराई है..
तोड़ सीमाए लाज की ..
सभी ने भंग आज चढ़ाई है..
बुरा ना मानो होली आई है................रामेश्वरी
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