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Monday, March 5, 2012

नियम तोड़ पाती

काश मैं भी सारे नियम तोड़ पाती ..
मौंत किसी के भी अपनों की ना होती, 
अपने प्यारे पापा धरती पर लौटा लाती..
समय की सुइयां भी उल्टा घुमा पाती ..
फिर से अपने बचपन, मैं लौट जाती...
सुख हर पेड़ पर उगता, मैं तोड़ सुख..
हर दुखी इंसान की झोली डाल आती ..
पंख अपने लगा खुद, सारा आकाश ...
खुद में समां पाती .........
तोड़ तारे आसमां से, सवांरती रूप अपना ..
चाँद तोड़ बना बिंदिया माथे अपने सजाती ..
खुदा भी रश्क खाते हमसे, 

खुदा की खुदाई चुरा लाती........रामेश्वरी

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