आ रहा है फिर से ..
फागुन का त्यौहार ..
रंग हो इसमें बस प्रीत के..
डारो इक दूजे पर बस..
प्रेम की ही फूहार......
ना राग द्वेष ना नफरत ..
फले फुले ह्रदय में सभी के ..
हर्षो-उल्लास ..
दे रही धरती भी रंग पलाश ..
फिर क्यूँ हो क्रित्रिम रंग, ढंग..
प्राकृतिक विधि का अनुसार हो ..
प्यार से ओत प्रोत त्यौहार हो..............रामेश्वरी (गंदे रंगों का प्रयोग नहीं करें)
फागुन का त्यौहार ..
रंग हो इसमें बस प्रीत के..
डारो इक दूजे पर बस..
प्रेम की ही फूहार......
ना राग द्वेष ना नफरत ..
फले फुले ह्रदय में सभी के ..
हर्षो-उल्लास ..
दे रही धरती भी रंग पलाश ..
फिर क्यूँ हो क्रित्रिम रंग, ढंग..
प्राकृतिक विधि का अनुसार हो ..
प्यार से ओत प्रोत त्यौहार हो..............रामेश्वरी (गंदे रंगों का प्रयोग नहीं करें)
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