मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
Search My Blog
Wednesday, March 28, 2012
हर मौसम यहाँ से आया और गया ...
अंकुरित हुआ नहीं बीज अभी तक..
प्यासी धरा, तृप्त हुई क्यूँ नहीं?
क्यूँ हर मौसम, यूँ ही ऊपर से गुजर गया..
क्यूँ कलेजा इस धरा का, दो बूँद पानी को..
पपीहे समान, प्यासा तकता ही रह गया ?...........रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment