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Saturday, March 31, 2012

पिता की प्रेमिका, बहु बनी, देखो आया ज़माना कैसा है?
बेटी का प्रेमी, पिता बना, रिश्तों में आया फेर ये कैसा है ?

गंगा बहे हरित वर्ण तन पर लिए, धूमिल वर्ण चढ़ा उस पर, फिर  ये कैसा है ?
नेक पार लगे डुबकी मार, पापी बैठा लिए एक तार, लगा ढेर पापियों का कैसा है?

आकाश भी अब पानी बरसाता नहीं, बरसाता वो आंसू नमकीन, ये नमक कैसा है?
शायद चाहता नहीं घाव भरे पापियों के, ईश्वर का विस्मय कारी न्याय ये कैसा है ?........

सुनी बालपन में, कहावत एक, अंधों में काना राजा भी होता है, पर ये ज़माना कैसा है?
अब कानी सोयी प्रजा पर, विराजता अँधा राजा है, वो ज़माना कैसा था, ये ज़माना कैसा है ?..............रामेश्वरी 

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