Search My Blog

Friday, March 30, 2012

बनाओ मिजाज़ अपना भी, उस बहते दरिया की तरह...
मीलों चलकर मिले जो सागर से, आंसू भी दिखे ना उसके पानी में मिलकर .............रामेश्वरी 

No comments:

Post a Comment