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Friday, March 30, 2012

आज छुट्टी है स्कूल की..
सजा ना देना दोस्तों जो भी भूल की...
चलो मस्ती से खेलेंगे खेल कई..
इक बारी मेरी होगी, इक बारी तेरी की...
लड़ेंगे नहीं मम्मियों को लड़ने दो..
आज घर घर, कल खो खो होगा...
मैं बनूंगी मम्मी सबकी, 
सबको बच्चा बनना होगा...
यूँ ही खेलते२ छुट्टी बिताएंगे...
दो दिन अब किताबों को..
हाथ नहीं हम लगायेंगे ...
आज नहीं लड़ेंगे अभी हम बच्चे हैं..
धर्म जाति से अभी अक्ल के कच्चे हैं..
कभी गुरूद्वारे लंगर, कभी छीन कर चीज खायेंगे...
आओ कवी, उषा, आनंदी, फिर ये दिन चले जायेंगे...रामेश्वरी 

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