Search My Blog

Monday, March 5, 2012

माथे बिंदिया, हाथ कंगन , छम छम पायल क्सिके लिए 
मिटी रंगत मेहंदी की , कैसा ये अब सोलह श्रृंगार प्रिये ...
विरह अग्नि भस्म करे, रूप रंग मेरा, व्यर्थ तुझ बिन श्रृंगार प्रिये.......रामेश्वरी

No comments:

Post a Comment