मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Thursday, April 12, 2012
खिले बाग़ में फूल कई, कोई अकेला खिला, क्या आजमा रहा होता है |
इतने बड़े गुलिस्तां में वो, कांटो पर खिल कर भी मुस्कुरा रहा होता है....
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