एक बार एक जंगल में सभी गधे सभा कर रहे थे, कि हम सभी एक हैं और सभी गधे भी हैं तो क्यूँ हम अपना राजा शेर को बनायें | शेर कि अक्ल और शक्ति से हमें क्या लेना देना ? चुनाव हुए और सभी गधों ने अपने समाज से ही इक गधे को राजा बना दिया| बेचारा शेर मूंह लटकाएं उनकी काम अक्ली और मूर्खता को देख चुपचाप बैठा रहा, वह अकेले करता भी क्या क्यूंकि बहुतमत उसके खिलाफ ही था| पर देखिये उनका निर्णय का फल, राजा गधा आखिर गधा ही ठहरा, बिना प्रजा कि लात मारे वो काम ही ना करे, और सारे गधे उसे लात मारें तो सजा ए मौत कि सजा| इधर कुआँ उधर खाई, ये बात उन्हें अब बहुत देर से समझ आई, जब प्रजा खुद ना घर कि ना घाट कि कहलाई | और प्रजा करती भी क्या, कुछ साल फिर नए चुनाव होने तक मूंह ताकती रही..........

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