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Tuesday, April 3, 2012

मिले जो दीदार आशिक को यार का ..
मज़ा है तभी दीवानों, मेरे इंतज़ार का ...

लबों पर उनके गज़ब की मुस्कराहट है ..
जानते नहीं,शबब हैं वो , मेरे करार का ....

बहार उन्ही से है, इस फिजा ऐ दिल में 
चाह किसे अब, इस मौसम ऐ बहार का ..

दिल धडकता है उन्ही की धडकनों से..
इक बार एतबार कर, मेरे एतबार का ...

दौड़ रही लहू में चाहत की तरंगे यूँ ही ...
सवाल कहाँ है अब इन पर इख्तियार का ...

कहते हो, क्या कीमत है मेरी निगाहों में तेरी ..
मोल भाव ना कर, ये खिलौना नहीं बाज़ार का ...

लटें बिखरी, लिबास ज़र२, लहूलूहान हूँ ठोकरों से ..
शायद यही है अंजाम ऐ सरहद तेरे मेरे प्यार का ...

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