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Thursday, April 12, 2012

रोटी

जब भर पेट दुनिया, सोयी नज़र आती है ...
इक बच्ची कहीं सिसकियों में रोती नज़र आती है.....
पुछा जो उससे जा करीब उसके...
क्या कारण है सिसकियों का उसके...
बोली जैसे तैसे आंसू रोक वो....
जो रोटी मांगी थी मैंने, इक सेठानी से ...
भूख शांत करने उदर को अपने..
सेठानी ने वो रोटी ...
अपने पालतू कुत्ते को डाल दी.....
धकेल मुझे द्वार से अपने,
उसने चटकनी लगा दी....
सोच रही हूँ अंकल मैं कुत्ता ही होती...
किसी सेठ के घर मजे से सोफे सोयी होती.................रामेश्वरी

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