अब मकान पक्के और ईमानदारी कच्ची है ..
सूली चढ़ता वही, जिसके गर्दन जुबां सच्ची है..
अब मकान पक्के और ईमान कच्चा है...
अब वफ़ा भी ऊँची हैसियत का दामन थामती है .
सूली चढ़ता वही, जिसके गर्दन जुबां सच्ची है..
अब मकान पक्के और ईमान कच्चा है...
अब वफ़ा भी ऊँची हैसियत का दामन थामती है .
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