मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Thursday, April 12, 2012
चलो फिर आज धुल से धूमिल आँगन को पोतना है |
लम्हा२ उजड़ा था आँगन ये, फिर से इससे जोतना है ||
दो चार बीज लायी हूँ, ख़ुशी के उधार, बेगाने से, हल भी जोतना है |
पनपेगा धीरे२, फल लगेंगे ख़ुशी के, उधार वापसी का भी सोचना है ||.............रामेश्वरी
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