मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Sunday, April 1, 2012
बेदर्द मत फूंक इस आशियाने को, समझ किसी गैर का आशियाना...
गर इस आशियाने में मेहमां तेरा कोई अपना हुआ, मुश्किल होगा फिर बुझाना इसका.............
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