प्यार कुछ नहीं बस इक सरफिरा जूनून होता है...
नहीं जिसमे कुछ दिन चैन, ना सुकून होता है..
पागलों सी हालत होती है, हमारे भीतर हम नहीं..
सुने ना हमारी एक, कोई अनजान शख्स छुपा होता है...
करे दिल्लगी वो, और सारा इलज़ाम हमीं पर होता है...
हालत इसमें ऐसी, ना पैर ज़मीन पर ना आसमा पर होता है....
बचो इस रोग से दोस्तों, इस दर्द में भी हर कोई हंस रहा होता है......
इस रोग का हकीम भी, इसी दर्द की दवा ढून्ढ रहा होता है.....................
नहीं जिसमे कुछ दिन चैन, ना सुकून होता है..
पागलों सी हालत होती है, हमारे भीतर हम नहीं..
सुने ना हमारी एक, कोई अनजान शख्स छुपा होता है...
करे दिल्लगी वो, और सारा इलज़ाम हमीं पर होता है...
हालत इसमें ऐसी, ना पैर ज़मीन पर ना आसमा पर होता है....
बचो इस रोग से दोस्तों, इस दर्द में भी हर कोई हंस रहा होता है......
इस रोग का हकीम भी, इसी दर्द की दवा ढून्ढ रहा होता है.....................
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