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Friday, December 30, 2011

a few line i wrote for my rameshwari ji ,


ये कैसा जीवन का आगाज प्रिये , 
बंजर धरती पर पहली पावस की बूँद ज्यों करती है नवजीवन का संचार प्रिये 
देखा तुम्हे जब मन मोहिनी , ह्रदय में अंकुर फूटे , हुए प्रेम में अभिसार प्रिये 
तुम्हे भी होगा इसका अहसास मृदु भासिनी ? सुहासिनी ?
मृद होठो की हंसी पीड़ित ह्रदय की आस हुई , नव्योवना तुम अपना आराध्य हुई , 
राग रंग , वसंत तुम मेरा , ह्रदय के वीणा के तारों की तुम झंकार हुई , 
अब सुध नहीं , बैरन दुनिया सही, तुम ही हो अपना संसार प्रिये , 
क्या होगा तुम्हे भी यह अहसास प्रिये ?
इधर अपना सर्वस्व समर्पण , इस मिटटी पर है तुम्हारा अधिकार प्रिये , 
जीवन दो इस प्रेम लता को , होगा बड़ा उपकार प्रिये , 
साँसे थमती है , दर्शन दो , कैसे तुम बिन जाना होगा उस पार प्रिये 

थैंक्स दीपक अनसूया

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