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Thursday, December 15, 2011

मैं बल हूँ बला हूँ..हलाहल नहीं....
जलजला हूँ ..अबला अब नहीं मैं ..
गीता का सार हूँ मैं..
महाभारत के पद हूँ मैं..
द्रौपदी पर अब नहीं मैं ..
मैं अब सर्प दंड धारी हूँ..
सच्चाई से बंद गांधारी नहीं मैं.
अब मैं सीता नहीं अब मैं..
मंदोदरी भी नहीं....
जिसका लोहा दुनिया माने वो..
सुन्दर सी भारतीय परी हूँ मैं...
कुछ करने का, एवेरेस्ट पर चड़ने का ..
लावा जिसके ह्रदय में भरा ....वो
सौन्देर्यमुखी जवालामुखी हूँ मैं..
रोने से मेरे ये तू ना समझ...
कमजोर आहात हूँ मैं..
आहात तेरी कायरता से हूँ मैं..
दो जून रोटी को दांव ....
जिसने मेरा खेला है...
उस वक़्त तू दुशाशन था
अब कलयुगी पिता है तू...
अस्मिता पर लगे जो सवाल..
धरती दो कर दूं .वो सीता हूँ मैं....
चीरहरण जो हो मेरा...
नारायणी खुद हूँ मैं.........रामेश्वरी

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