लम्बी लम्बी सर्द रातों में..
रातें कटी बातों बातों में ..
संगीत सुना रहे किटकिटाते दन्त..
नृत्य करती अँगुलियों का नहीं अंत..
गालों में देखो कैसी बिना लाली के लाली है..
ये सर्दियां बड़ी सर्द, जालिम, मतवाली है...
बिना संगीत बजे...शरीर कांपे, करे रोक एंड रोल है...
जला कर सब अंगीठियां, घेरा बनाये बैठे सब गोल हैं..
बिना मिर्ची डाल जीहवा में देखो श्श्शश्श की धुन है....
करें स्त्रियाँ आजकल कैसे स्वेअटर की उधेड़ बुन हैं...
आजकल दिवाकर भी बदलियों से इश्क फरमा रहे..
देख देख बदलियों की चालें दिवाकर भी शरमा रहे..
धन्यवाद भी देना चाहूं तुझे ऐ सर्दी...
जो लड़ते अलग2अब इक ही रजाई में आराम फरमा रहे..
गरम जलेबी, गर्म मूंगफली, गर्म समोसे, गरमा गर्म चाय है..
फ़िदा थे कभी जिस आईस क्रीम पर अब कहाँ वो भाय हैं....
छत की मुंडेर देखो, कैसे भरी है महिलाओं की चुगलियों से...
अब हटते नहीं, उंगलियाँ चलती रहती बुनाई की सिलायिओं से...
रातें कटी बातों बातों में ..
संगीत सुना रहे किटकिटाते दन्त..
नृत्य करती अँगुलियों का नहीं अंत..
गालों में देखो कैसी बिना लाली के लाली है..
ये सर्दियां बड़ी सर्द, जालिम, मतवाली है...
बिना संगीत बजे...शरीर कांपे, करे रोक एंड रोल है...
जला कर सब अंगीठियां, घेरा बनाये बैठे सब गोल हैं..
बिना मिर्ची डाल जीहवा में देखो श्श्शश्श की धुन है....
करें स्त्रियाँ आजकल कैसे स्वेअटर की उधेड़ बुन हैं...
आजकल दिवाकर भी बदलियों से इश्क फरमा रहे..
देख देख बदलियों की चालें दिवाकर भी शरमा रहे..
धन्यवाद भी देना चाहूं तुझे ऐ सर्दी...
जो लड़ते अलग2अब इक ही रजाई में आराम फरमा रहे..
गरम जलेबी, गर्म मूंगफली, गर्म समोसे, गरमा गर्म चाय है..
फ़िदा थे कभी जिस आईस क्रीम पर अब कहाँ वो भाय हैं....
छत की मुंडेर देखो, कैसे भरी है महिलाओं की चुगलियों से...
अब हटते नहीं, उंगलियाँ चलती रहती बुनाई की सिलायिओं से...

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