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Wednesday, December 21, 2011

लोगो के निकट उजाला दोपहर का...
मेरे करीब अँधियारा क्यूँ पहर का..

आगे सभी के मय है..
मदिरा के प्याले हैं..
मेरे आगे हलाहल ...?
हलाहल के प्याला क्यूँ ?

शायद सजा है सच बोलने की...
मीरा बन कृष्ण को पूजने की...
झूठ मदमस्त रहे....
साजिश ये हुकमरानो की ..
जमूरियत नाचे जमूरा अँधेरे में..
मदारी बन नचाने की......रामेश्वरी ......

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