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Friday, December 16, 2011

कडकडाती ठण्ड में..
पथ्हर का सिरहाना ..
फुटपाथ का बिस्तर ...
मिटटी की रजाई ...
देखो कैसे मैंने सजाई ...
फिर भी सारा आसमा हम ख़ुशी2ओड़ते हैं..
सुबह फिर श्रम करने चुस्ती से दौड़ते हैं ....रामेश्वरी

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