अक्सर ऐसा होता है...
भीड़ में, मेले में......
कोई अपना ही खोता है...
हम रोये जब जब अपनों के लिए..
बेदर्द ज़माना बड़े चैन से सोता है......रामेश्वरी
भीड़ में, मेले में......
कोई अपना ही खोता है...
हम रोये जब जब अपनों के लिए..
बेदर्द ज़माना बड़े चैन से सोता है......रामेश्वरी
बहुत खूब सूरत पंक्तियाँ ....
ReplyDeletethanks anu ji...
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