बेईमानी के युग में ..
इमानदारी की बातें.....
क्यूँ करते हो तुम ?
पतझड़ में झड़े पात पात..
तुम उसमे सावन लाने की बातें..]
दुनिया बदल दोगे तुम....ऐसी बातें
क्यूँ करते हो तुम ?
जब सब हो कौरव युद्ध स्थल में...
इस युग में मुझे पांडव बनने की बातें ..
क्यूँ करते हो तुम ?
अंधेर नगरी चौपट राजा है..
उस पर हमें आँखें देने की बातें ...
क्यों करते हो तुम ?
चोर चोर मौसेरे भाई ...
उस पर मुझे भी मौसी बनाने की बातें..
क्यूँ करते हो तुम ?
सब अपना पेट भर रहे..
तिजौरी अपनी भरे हैं.....
मुझे करण. बनू मैं की बातें ...
क्यूँ करते हो तुम?
बह रही दरिया जब..
सब हाथ अपने धो रहे...
इस युग में मैले हाथ ...
क्यूँ करते हो तुम?..................रामेश्वर ी
इमानदारी की बातें.....
क्यूँ करते हो तुम ?
पतझड़ में झड़े पात पात..
तुम उसमे सावन लाने की बातें..]
दुनिया बदल दोगे तुम....ऐसी बातें
क्यूँ करते हो तुम ?
जब सब हो कौरव युद्ध स्थल में...
इस युग में मुझे पांडव बनने की बातें ..
क्यूँ करते हो तुम ?
अंधेर नगरी चौपट राजा है..
उस पर हमें आँखें देने की बातें ...
क्यों करते हो तुम ?
चोर चोर मौसेरे भाई ...
उस पर मुझे भी मौसी बनाने की बातें..
क्यूँ करते हो तुम ?
सब अपना पेट भर रहे..
तिजौरी अपनी भरे हैं.....
मुझे करण. बनू मैं की बातें ...
क्यूँ करते हो तुम?
बह रही दरिया जब..
सब हाथ अपने धो रहे...
इस युग में मैले हाथ ...
क्यूँ करते हो तुम?..................रामेश्वर
beautiful poem.
ReplyDeletebahut bahut dhanaywaad sinha ji..namaskar
ReplyDelete