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Monday, November 28, 2011

यूँ ही दिल ने ....................
इश्वर अस्तित्व की आजमाईश की थी...
दुनिया में हो शांति...
प्रेम भाई भाई में हो..
डिग्गे न ईमान किसी का..
बच्चियों का अस्तित्व बचे ..
इश्वर ने कहा..
चल पगली एक और इश्वर चाहती है...
पर मैंने भी क्या किया था...
बस इतनी सी तो इश्वर से फरमाईश की थी......रामेश्वरी

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