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Monday, November 28, 2011

आये दिन बढ रहे आम आदमी के हाथों से परेशान..
घबराएं हुए कहाँ बचे अब जान ..

बोले आला ऐ कमान..
"बोल कहाँ रहता है आम आदमी और
कैसा है उसका आकार?"
क्या उसकी पहचान है ..?
क्या उसका धर्म रंग रूप?
भीड़ में कैसे जाने हम..
कौन आम आदमी?

चपरासी साहेब बोले..
हे मेरी सरकार ..
हम बताते है उसका रूप और आकार ..
शायद वो सरदार से थे..
सर में उनके पगड़ी थी...
दुसरे बोले...नहीं नहीं सरकार..
वो लम्बे थे...
बिना पगड़ी के थे..
हमने तो ऐसा ही देखा था ..
पिछली बार उसका आकार..
तीसरे बोल पड़े..
हे मेरी सरकार..मैं बताता हूँ..
चरणों मै आपके बा मुलाय्हजा ..
सलाम बजाता हूँ..
आम आदमी सबसे पहली बार...
मैंने ही देखा था...
वो जवान था...
pada लिखा था खूब..
किसी ने उसको पागल कह कर ..
पुकारा था..
जब हिफाजत के स्त्रियों के लिए ..
उसने पहली बार हाथ बढाया था.
में वहीँ पहली बार आम आदमी पाया था ..

मंत्री बोले...
अब क्या होगा..
कैसे आम आदमी पहचानेगे..?
कैसे उसके बढते हाथ रोकेंगे..
"जाओ अभी..दूंद कर आम आदमी लाओ.."
जब तलक मैं फरमान जारी karwata हूँ..
हाथ काट दिया जाए आम आदमी के ....
और अब से...चुनाव में.....
अब से पैर का अंगूठा वोट पर लगवाता हूँ...रामेश्वरी

3 comments:

  1. हाथ काट दिया जाए आम आदमी के ....
    और अब से...चुनाव में.....
    अब से पैर का अंगूठा वोट पर लगवाता हूँ..

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