हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
शिक्षा में,दीक्षा में...
रेल में रिक्शा में...
बड़ी बड़ी परीक्षा में...
घर में बाज़ार में ..
अब तो रिश्तों में, शिस्टाचार में....
.
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
दीन main ईमान में..
राशन की दूकान में..
माँ की रसोई में..
सब्जियों के तोल में..
घटते बड़ते मोल में..
गैस की भरपाई में..
नोटों की गडडी बन ..
दबी रजाई में..
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
सड़क पर जब सरेआम बच्चा जन्म लेता है..
इंसानियत भी देखो कैसे गर्म जेबों में बंद रहता है ...
देखो देखो ...
खुलेआम बिकता इमानदारी का अच्चार दिखता है..
आज की राधा में, आज के कृष्णा में..
कोडियों के भाव बिकता प्यार दिखता है..
भूख में हमारी, हमारी तृष्णा में..
मिलावट बन हर जगह बस्ता है...
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
विद्या के मंदिर में..शिक्षा पाने को..
विद्या के ठेकेदरों को मनाने में...
दान बन भारस्ताचार दिखता है..
ज्ञान भी हाय रे अब....दान में बिकता है..
अब तो परिवारों में भी भ्रस्ताचार है...
जिसके घर हो धन दौलत उसी का सारा परिवार है
आज कसम यही में तो खाऊंगी..
गाय को घास अवश्य....
पर घूस किसी को ना खिलाऊंगी..
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
(रामेश्वरी)
शिक्षा में,दीक्षा में...
रेल में रिक्शा में...
बड़ी बड़ी परीक्षा में...
घर में बाज़ार में ..
अब तो रिश्तों में, शिस्टाचार में....
.
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
दीन main ईमान में..
राशन की दूकान में..
माँ की रसोई में..
सब्जियों के तोल में..
घटते बड़ते मोल में..
गैस की भरपाई में..
नोटों की गडडी बन ..
दबी रजाई में..
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
सड़क पर जब सरेआम बच्चा जन्म लेता है..
इंसानियत भी देखो कैसे गर्म जेबों में बंद रहता है ...
देखो देखो ...
खुलेआम बिकता इमानदारी का अच्चार दिखता है..
आज की राधा में, आज के कृष्णा में..
कोडियों के भाव बिकता प्यार दिखता है..
भूख में हमारी, हमारी तृष्णा में..
मिलावट बन हर जगह बस्ता है...
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
विद्या के मंदिर में..शिक्षा पाने को..
विद्या के ठेकेदरों को मनाने में...
दान बन भारस्ताचार दिखता है..
ज्ञान भी हाय रे अब....दान में बिकता है..
अब तो परिवारों में भी भ्रस्ताचार है...
जिसके घर हो धन दौलत उसी का सारा परिवार है
आज कसम यही में तो खाऊंगी..
गाय को घास अवश्य....
पर घूस किसी को ना खिलाऊंगी..
हाय हाय रे भ्रस्टाचार है...
(रामेश्वरी)

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