कितनी अजीबो गरीब ये किताब और फलसफे ज़िन्दगी हैं ...
इसके लेखक भी हम...इसके पाठक भी हम ही हम हैं ....
फलसफो में देखिये...भरे पड़े फलसफे गम ही गम हैं (रामेश्वरी )
इसके लेखक भी हम...इसके पाठक भी हम ही हम हैं ....
फलसफो में देखिये...भरे पड़े फलसफे गम ही गम हैं (रामेश्वरी )
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