चलो सच को फिर से बे हया किया जाए...
उसकी अस्मत को तार तार किया जाए...
झूठ को बेशकीमती ओडनी ओडायी जाए...
हया वो सब की है..सबकी वो लाज है...
आओ उसका दुल्हन सा श्रृंगार किया जाए.....रामेश्वरी
उसकी अस्मत को तार तार किया जाए...
झूठ को बेशकीमती ओडनी ओडायी जाए...
हया वो सब की है..सबकी वो लाज है...
आओ उसका दुल्हन सा श्रृंगार किया जाए.....रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment